कोरोना बनाम डोरोना

कोरोना के चलते घरों में दुबके हैं, दिन भर हाथ धो रहे, डॉक्टर की जहाँ से भी सलाह मिल रही उसे ले रहे, पहले छींक आती थी तो मन खुश होता था कि कोई याद कर रहा, आज छींक आर ही तो हिल जा रहे कि ऊपर वाला तो याद नही कर रहा, टीवी पर अमरीका, चीन, इटली, चाइना तक मे भी किसी मौत की खबर आ रही तो अपने शहर का राजघाट दिमाग मे घूम जा रहा, सब्जी, दूध, के लिए खिड़की पर टकटकी लगाए देख रहे, यह बीमारी भी विदेशी है हैंड वाश, सेनेटाइजर, इसोलेशन, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, सब करना पड़ रहा, लगता है अब साइकिल चलाना फिर से सीखना पड़ेगा लॉक डाउन के बाद, कहीं भूल न जाय बचपन मे बड़ी मेहनत से गिरते पड़ते सीखे थे,


कोरोना से बड़ा वायरस है डोरोना, चारो तरफ डर ही डर, सड़क पर डर, घर मे डर, दवा की पन्नी से डर, अखबार से डर, जो भी कुछ देर घर से बाहर होकर आया उससे डर, दूधवाले से डर, सब्जी वाले से डर, बस डर ही डर, tv अलग से डर बांट रहा, तमाम लोग पम्पलेट छपवा कर डर बांट रहे, सोशल मीडिया तो पूरा भँकाऊ बनकर डर फैला रहा, कोरोना से बच भी जाये तो डोरोना पगला दे रहा, अब उसके लक्षण भी दिखने लगे हैं तमाम लोग तो जैसे सनपात गए हैं, अजीब अजीब हरकत कर रहे, कोई गा रहा, कोई थाली बजा रहा, बच्चों से एडवाइजरी ब्रॉडकास्ट करा रहा, कोई किताब लेकर फ़ोटो खिंचवा कर पोस्ट कर रहा, कोई लिट्टी लगाते, पकौड़ी छानते, वीडियो पोस्ट कर रहा, जैसे दिमाग ही सनक गया है घर मे रहते रहते, असामान्य सी हरकत,


कोरोना खत्म होगा घर मे रहिये,मेडिकल एडवाइजरी का पालन करिये, लेकिन डोरोना न फैलाइये वरना यह घर कर गया दिल दिमाग मे तो फिर कोरोना से बड़ी दिक्कत करेगा


कोरोना से तो डॉ निपट रहे, डोरोना के लिए बाद में आज भूमिगत हुए सोखा, ओझा, पीर, मौलवी अपनी दुकान खोलेंगे, फिर शुरू होगा धूप धुनिहर, झाड़ फूंक, चादर मजार का खेल,


इसलिए हे मीडिया सरकार है सोशल मीडिया के बाहुबलियों कृपया कोरोना से लड़ने के चक्कर मे डोरोना के फेर में न डालिये।




श्रीधर मिश्र की कलम से