*एक आइसोलेशन यह भी !*



अभी पिछली सदी के पूर्वार्द्ध तक संक्रामक रोग यक्ष्मा अर्थात टीबी को लाइलाज माना जाता था। इससे पीड़ित मरीज़ों का घर-परिवार से दूर कहीं एकांत में निर्वासन ही इससे बचाव का एकमात्र रास्ता था। यह ऐसा आइसोलेशन था जो ज्यादातर मामलों में जीवन के साथ ही खत्म होता था।। ऐसे ही एक दुर्भाग्यपूर्ण आइसोलेशन की कहानी एरिजोना के घर-घर में सुनाई जाती है। एरिजोना का गुली दुर्भाग्य से टीवी से संक्रमित हो गया। लोगों ने उसे फीनिक्स की पहाड़ी में आइसोलेशन में रहने का फ़रमान सुनाया। गुली को अपनी नन्ही बेटी मैरी से अथाह अनुराग था जिसके बगैर जीने की कल्पना भी उसके लिए कठिन थी। मजबूरन जीवन के अंतिम वर्षों में उसे फ़ीनिक्स में निर्वासन का एकांत जीवन जीना पड़ा था जहां उसे अपनी बेटी और पत्नी तक से मिलने की अनुमति नहीं थी। निर्वासन में गुली को ख्याल आया कि वह ऐसा कुछ रच जाय जो उसके मरने के बाद बेटी को उसकी याद दिलाती रहे। धन और संसाधनों की कमी थी तो उसने इलाके से पत्थर के टुकड़े, घरेलू कबाड़, जंग खाए धातु, गाड़ियों के पहिए और बेकार पुर्जे, रेल की पटरियां, बिजली और टेलीफोन के अनुपयोगी खंभे जैसी चीज़ों को जमा किया। पास के थोड़े-बहुत पैसों से उसने कुछ मजदूरों की सेवा ली और कुछ सालों में ही अठारह कमरों का एक तिमंजिला महल खड़ा कर दिया। साधनों के अभाव में इस महल की फिनिशिंग वह नहीं करवा सका। इसी बीच एकांतवास में ही 1945 में गुली की मौत हो गई।

गुली के मरने के बाद मैरी को एटर्नी से पता चला कि उसका पिता फ़ीनिक्स में उसके लिए कोई संपति छोड़ गया है। स्तब्ध मैरी ने जब मां के साथ पिता के बनाए हुए महल में प्रवेश किया तो उसके आंसू नहीं थम रहे थे। दुनिया भर के अखबारों ने पिता के बेपनाह प्यार के प्रतीक इस महल और इसके पीछे की कहानी को प्रमुखता से प्रकाशित कर इसे दुनिया भर में चर्चित कर दिया।  मैरी ने अपना बाकी जीवन बीमार पिता के बनाए इसी महल में गुज़ार दिया। मैरी के मरने के बाद मिस्ट्री कैसल के नाम से मशहूर हो चुके इस महल की देखरेख मिस्ट्री कैसल फाउंडेशन नाम की एक संस्था कर रही है।

दुनिया मे पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका की स्मृति में बनाई गई बहुत सारी इमारतें हैं। *पिता और पुत्री के प्रेम का यह एकमात्र स्मारक आज फ़ीनिक्स के लोगों के लिए गर्व और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।*


- ध्रुव गुप्त (आईपीएस)