कर्फ्यू

मद्धिम रौशनी •••
अलसाई आँखें •••
और!
अँगड़ाई लेता इश्क ••
एक आहट नहीं-
एक करवट नहीं-
पलकों के कोरों तक पर-
कोई हलचल नहीं •••
कर्फ्यू है!
यादों पर•••
पहरों पर •••
और इस कर्फ्यू में मैं एकटक-
अपलक निहार रहा हूँ-
बिना तुम्हे बताए-
बिना तुम्हारे जाने-
बिना तुम्हारी इजाज़त के!


क्या मुझे इजाज़त है?
बिना तुम्हारी इजाज़त के-
 तुम्हें देखने की•••••।
क्या मुझे इजाज़त है?
बिना तुम्हारी इजाज़त के-
इस इबादत की •••••
इस आहट की-
इस चाहत की-
ऊपर-ऊपर से शांत दिख रहे-
अंदर की सारी अकुलाहट को-
शब्द देने की•••
स्वर देने की•••
क्या मुझे इजाज़त है?
बिना तुम्हारी इजाज़त के-
तुम्हेंअपने ख़्वाबों में देख लेने की ••।
बिना तुम्हारी इजाज़त के-
आहिस्ते से,
तुम्हारे अकेलेपन/एकांतवास 
के कर्फ्यू में-
धारा 144 का उल्लंघन करने की•••।


-डाॅ. राजेश कुमार