गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर होती है पूजा : अमरनाथ तिवारी


दिल्ली के द्वारका के रहने वाले अमरनाथ तिवारी ने बताया कि हिन्दू धर्म मे कहा जाता है कि द्वापर युग में लोग इंद्र देव की पूजा करते थे। लोग उन्हें तरह-तरह के पकवानों व मिठाइयों का भोग लगाते थे। शरद ऋतु के आगमन पर मेघ देवता देवराज इंद्र की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने की प्रम्परा थी !!


 एक बार भगवान श्री कृष्ण गायों को चराते हुए गोवर्धन पर्वत के पास पहुंचे तो यह देखकर हैरान हो गए कि सैकड़ों गोपियां पकवान बनाकर उत्सव मना रही थीं। अौर पुछने पर उन्होने बताया की वो इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए यह सब कर रहीं हैं, ताकि ब्रज में इन्द्र देवता बारिश कराएं ज़िससे अन्न पैदा हो।


भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से कहा कि इंद्र देवता के बदले गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। इस पर्वत के कारण ही बारिश होती है। इसके बाद ब्रजवासी गोवर्धन की पूजा में लग गए।


इसे इंद्र ने अपना अपमान माना। क्रोधित इंद्र ने मेघों को आदेश दिया कि वे ब्रज में मूसलाधार बारिश कर सबकुछ तहस-नहस कर दें। मेघों ने ऐसा ही किया।


सबकुछ नष्ट होता देख ब्रजवासी घबराकर श्रीकृष्ण के पास गए। 


ऐसी मान्यता हैं कि सात दिनों तक मूसलाधार बारिश होती रही। इस बीच ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी अंगुली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था. यानी भगवान कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी. कहतें हैं उसी दिन से लोग अपने गावों में मिलजुल कर गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं.पूजा करते हैं अौर ये त्येवहार को मनाते हैं !!